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✦ स्तोत्र • Stotra ✦

Sankat Nashan Ganesh Stotra

संकटनाशन गणेश स्तोत्र
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नारद रचित संकटनाशन स्तोत्र — गणेश के बारह पवित्र नामों का स्मरण कर सभी संकटों, विघ्नों और कष्टों से मुक्ति पाएं।

परिचय — Narad Uvach

नारद पुराण में देवर्षि नारद ने यह स्तोत्र कहा है। इसमें गणेश के बारह पवित्र नाम हैं जिनके त्रिकाल पाठ से कोई भी विघ्न नहीं आता। यह स्तोत्र संकट के समय तत्काल सहायक है।

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सम्पूर्ण स्तोत्र — Complete Stotra
नारद उवाच — प्रारम्भ
नारद उवाच।
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुः कामार्थसिद्धये॥
नारद बोले — गौरी-पुत्र विनायक देव को सिर झुकाकर प्रणाम करके, भक्तों के हृदय में निवास करने वाले गणेश का नित्य स्मरण करें — आयु, काम और अर्थ की सिद्धि के लिए।
गणेश के १२ पावन नाम — 12 Sacred Names
प्रथमवक्रतुण्डVakratunda
द्वितीयएकदन्तEkadanta
तृतीयकृष्णपिंगाक्षKrishnapingaksha
चतुर्थगजवक्त्रGajavaktra
पञ्चमलम्बोदरLambodara
षष्ठविकटVikata
सप्तमविघ्नराजेन्द्रVighnarajendra
अष्टमधूम्रवर्णDhumravarna
नवमभालचन्द्रBhalachandra
दशमविनायकVinayaka
एकादशगणपतिGanapati
द्वादशगजाननGajanana
द्वादश नाम श्लोक
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥
प्रथम — वक्रतुण्ड, द्वितीय — एकदन्त, तृतीय — कृष्णपिंगाक्ष (काली-पीली आँखों वाले), चतुर्थ — गजवक्त्र, पञ्चम — लम्बोदर, षष्ठ — विकट, सप्तम — विघ्नराजेन्द्र, अष्टम — धूम्रवर्ण (धुएँ के रंग वाले), नवम — भालचन्द्र (ललाट पर चन्द्र धारण करने वाले), दशम — विनायक, एकादश — गणपति, द्वादश — गजानन।
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महिमा श्लोक
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिः करे स्थिता॥
जो मनुष्य इन बारह नामों को तीनों सन्ध्याओं में पढ़ता है उसे किसी विघ्न का भय नहीं रहता और सभी सिद्धियाँ उसके हाथ में आ जाती हैं।
फलश्रुति
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्॥

जपेत् गणपतिं स्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥
विद्यार्थी को विद्या, धन चाहने वाले को धन, पुत्र की इच्छा वाले को पुत्र और मोक्ष चाहने वाले को मुक्ति मिलती है। छह महीने जप से फल और एक वर्ष में सिद्धि मिलती है — इसमें कोई संशय नहीं।

पाठ विधि

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